जेफ्री एपस्टीन लिस्ट 2026: भारतीय नेताओं और व्यापारियों के नाम— जेफ्री एपस्टीन। साल 2026 की शुरुआत में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए लाखों पन्नों के नए दस्तावेजों ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। लेकिन इस बार यह चर्चा सिर्फ हॉलीवुड या अमेरिकी राजनीति तक सीमित नहीं है। इन फाइलों में भारत के कुछ सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी—के नाम भी शामिल होने से भारतीय सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है।लेकिन क्या इन नामों का उल्लेख होना यह दर्शाता है कि ये लोग किसी गलत काम में शामिल थे? या फिर यह एपस्टीन की खुद की प्रभावशीलता दिखाने की एक सोची-समझी चाल थी? चलिए, इस विस्तृत लेख में जेफ्री एपस्टीन लिस्ट 2026 के हर पहलू को गहराई से समझते हैं।जेफ्री एपस्टीन

फाइल्स 2026: भारत का कनेक्शन कैसे जुड़ा
जेफ्री एपस्टीन, जो एक सजायाफ्ता यौन अपराधी था, की 2019 में जेल में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से समय-समय पर अदालत के आदेशानुसार उससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाते रहे हैं। जनवरी 2026 में जारी हुई ताजा फाइलों में 30 लाख से अधिक पेज, 2,000 वीडियो और हजारों तस्वीरें शामिल हैं।इ
न दस्तावेजों में ‘India‘ और ‘Indian Leadership‘ के कई संदर्भ मिले हैं। मुख्य रूप से ये उल्लेख ईमेल बातचीत और एपस्टीन के निजी कैलेंडर में पाए गए हैं।
जेफ्री एपस्टीन लिस्ट 2026: भारतीय नेताओं और व्यापारियों के नाम — मोदी का सच
में सबसे चौंकाने वाला नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन ने जुलाई 2017 में एक ईमेल लिखा था जिसमें पीएम मोदी की इजरायल की ऐतिहासिक यात्रा का जिक्र था।
ईमेल का दावा क्या है
एपस्टीन ने अपने एक संदेश में कहा था कि पीएम मोदी ने उनकी सलाह पर अमल करते हुए इजरायल के साथ संबंधों को बेहतर किया ताकि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तालमेल बढ़ सके।”
भारत सरकार का रुख भारत के विदेश मंत्रालय (MEA)
ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से कहा,
प्रधानमंत्री की 2017 में इजरायल यात्रा एक औपचारिक तथ्य है। इसके अलावा, ईमेल में किए गए सभी दावे एक सजायाफ्ता अपराधी की ‘कचरा सोच’ हैं, जिन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाना चाहिए।
हरदीप सिंह पुरी: बिजनेस मीटिंग्स या कुछ और
इस सूची में दूसरा प्रमुख नाम हरदीप सिंह पुरी का है, जो वर्तमान में भारत के केंद्रीय मंत्री हैं। दस्तावेजों से पता चलता है कि 2014 से 2017 के बीच श्री पुरी ने न्यूयॉर्क में एपस्टीन के मैनहट्टन स्थित घर पर कई बैठकें की थीं।
मीटिंग्स की हकीकत
हरदीप सिंह पुरी ने इन रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये मुलाकातें पूरी तरह से पेशेवर और व्यापार संबंधी थीं। उस समय श्री पुरी एक पूर्व राजनयिक के रूप में कार्यरत थे और उन्होंने भारत में निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय उन्हें एपस्टीन की आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान
भारतीय व्यापारियों में अनिल अंबानी का नाम प्रमुखता से सामने आया है। फाइल्स के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच एपस्टीन और अनिल अंबानी के बीच कई संदेशों का आदान-प्रदान हुआ था।
विषय: दस्तावेजों के मुताबिक, अंबानी अपने रक्षा व्यवसाय के विस्तार के लिए एपस्टीन के माध्यम से अमेरिकी व्हाइट हाउस अधिकारियों और इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री एहुद बराक तक पहुंच बनाना चाहते थे।
मध्यस्थता: फाइल्स यह भी संकेत देती हैं कि एपस्टीन खुद को भारत सरकार और ट्रंप प्रशासन के बीच एक ‘बैकचैनल’ बनने की कोशिश कर रहा था।

क्या इन नामों का उल्लेख करना किसी अपराध के बराबर है
एक जिम्मेदार लेखक और पाठक के नाते हमें यह समझना जरूरी है कि यदि कोई व्यक्ति “एपस्टीन लिस्ट” में है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह किसी गैर कानूनी काम में शामिल था।
- Name -Droping आदत: जेफ्री एपस्टीन अक्सर अपनी शक्ति दिखाने के लिए बड़े राजनेताओं और अरबपतियों के नाम लिया करता था। वह यह जताना चाहता था कि उसकी पहुंच दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों तक है।
2. व्यापारिक नेटवर्किंग: एपस्टीन एक समय में वॉल स्ट्रीट पर एक प्रमुख नाम था। कई लोग उससे सिर्फ निवेश और व्यापार सलाह लेने के लिए मिलते थे।
3. कोई ठोस सबूत नहीं: अब तक इन 30 लाख पन्नों में ऐसा कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला है जो किसी भी भारतीय नेता को एपस्टीन के अवैध कार्यों से सीधे तौर पर जोड़ता हो।
निष्कर्ष :
जेफ्री एपस्टीन लिस्ट 2026: भारतीय नेताओं और व्यापारियों के नाम सामने आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि एपस्टीन भारतीय सत्ता और व्यापारिक क्षेत्रों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताया है। यह मामला हमें याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और व्यापार की दुनिया में कितनी जटिलताएं होती हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों की बजाय आधिकारिक बयानों और कोर्ट दस्तावेजों पर भरोसा करें।

FAQs:
Q1. क्या पीएम मोदी कभी जेफ्री एपस्टीन से मिले थे? नहीं, दस्तावेजों में किसी भी सीधी मुलाकात का कोई रिकॉर्ड नहीं है। केवल एपस्टीन के एक ईमेल में उनके नाम का उल्लेख किया गया है, जिसे भारत सरकार ने खारिज कर दिया है।
Q2. हरदीप सिंह पुरी एपस्टीन से क्यों मिले थे? रिपोर्ट्स के अनुसार, वे भारत में विदेशी निवेश लाने के संबंध में व्यावसायिक चर्चा करने मिले थे, जब वे सरकार में मंत्री नहीं थे।
Q3. क्या यह लिस्ट 2024 वाली लिस्ट से अलग है? हाँ, यह 2026 की नई फाइल रिलीज़ है जिसमें पहले से कहीं अधिक विस्तृत ईमेल और कैलेंडर प्रविष्टियाँ शामिल हैं।
Disclaimer : यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति की छवि को धूमिल करना नहीं, बल्कि जानकारी साझा करना है।